नहर मरम्मत के नाम पर 120 करोड़ का खेल, झाड़ू सरकार पर गंभीर सवाल – करोड़ों खर्च के बाद भी नहर नहीं झेल सकी पानी

माधोपुर हाइडल चैनल नहर घोटाला
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर झाड़ू सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला किसी छोटे खर्च का नहीं, बल्कि 120 करोड़ रुपये के महा घोटाले का बताया जा रहा है, जो माधोपुर हाइडल चैनल नहर की मरम्मत के नाम पर सामने आया है। जिस नहर को अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत ढांचे के साथ तैयार किए जाने का दावा किया गया था, वह महज 200 क्यूसेक पानी का दबाव भी सहन नहीं कर सकी।
120 करोड़ की मरम्मत और दो सौ क्यूसेक में ढही व्यवस्था
बताया जा रहा है कि माधोपुर हाइडल चैनल की 9 नंबर नहर की मरम्मत के लिए भारी-भरकम बजट पास किया गया था। कागजों में नहर को पूरी तरह दुरुस्त दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली। जैसे ही नहर में पानी छोड़ा गया, उसकी दीवारों में दरारें आने लगीं और कई हिस्सों में रिसाव शुरू हो गया।
सच सामने आया ठेकदार के पैसे खनाए का

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो नहर की क्षमता और गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई?
इस पूरे मामले ने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे जनता के पैसे की खुली लूट करार दिया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे कर सकता है।
माधोपुर हाइडल चैनल नहर का यह मामला सिर्फ एक निर्माण दोष नहीं, बल्कि सिस्टम में फैली गहरी खामियों की ओर इशारा करता है, जिसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है।
