
देश में गरीबी, भूख और असमानता को खत्म करने का लक्ष्य अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि एक मिशन बन चुका है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जो आने वाले समय में फूड सिक्योरिटी के नक्शे को पूरी तरह बदल सकता है। हर शहर, हर सिटी और हर जिले में ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जहां किसी भी गरीब के भूखे सोने का सवाल ही नहीं उठे
फूड सपोर्ट सिस्टम’ का कॉन्सेप्ट क्या है
- हर महीने गारंटीड अनाज वितरण
देशभर के गरीब, श्रमिक, प्रवासी और असंगठित वर्ग के लोगों के लिए ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें जिसके पास अधिकार है—उसे हर महीने खाद्यान्न की निश्चित मात्रा मिलनी ही मिलनी है – शहरों और जिलों में फूड स्टोरेज सेंटर, डिजिटल राशन चेक-प्वाइंट, और मोबाइल वितरण यूनिट बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि दूर-दराज़ या अस्थायी बस्तियों तक आसानी से अनाज पहुँच सके। हर जिले में फूड-डिपो की संख्या बढ़ाना – इससे रोज़गार की तलाश में शहर-शहर घूमने वाले श्रमिकों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी।
क्यों कहा जा रहा है कि ‘कोई गरीब भूखा नहीं रहेगा
इस नए मॉडल का असली मकसद सिर्फ अनाज देना नहीं है, बल्कि भूख की समस्या को स्थायी रूप से खत्म करना है।
➤ अनाज की नियमितता से पोषण सुरक्षा बढ़ती है
जब परिवारों को हर महीने तय मात्रा में खाद्यान्न मिलता रहेगा, तो कुपोषण और भूख की समस्या प्राकृतिक रूप से कम होगी।
➤ शहरों में रोज़ कमाने-खाने वाले वर्ग को सीधी राहत
दिहाड़ी मजदूर, अस्थायी कर्मचारी और प्रवासी परिवार सबसे अधिक लाभ में रहेंगे। डिजिटल रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक पहचान, और पोर्टेबल राशन कार्ड—ये तीनों मिलकर सुनिश्चित करेंगे कि असली हकदार तक ही अनाज पहुँचे –
PDS दुकानों में भीड़ कम होगी
ब्लॉक और तहसील स्तर पर “स्मार्ट फूड बैंक” खोलने की तैयारी
मोबाइल वैन के माध्यम से झुग्गी बस्तियों में सीधा वितरण
बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों के लिए doorstep-delivery सिस्टम पर विचार
ये सब कदम सरकार के उस विज़न को मजबूत करते हैं, जहां
देश का कोई भी नागरिक भूख के कारण पीछे न रह जाए – भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था दुनिया में सबसे विशाल है—और अब इसे आधुनिक, डिजिटल और सार्वभौमिक बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
अगर ये मॉडल पूरी तरह लागू होता है, तो आने वाले समय में यह कहना गलत नहीं होगा
