पंजाब के किसानों पर कितने लाख करोड़ का कर्ज है , जानिए पूरी हकीकत

हरित क्रांति की पहचान रहा पंजाब आज एक अलग ही संकट से जूझ रहा है। राज्य के किसानों पर कुल कर्ज़ का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुका है। यह सिर्फ़ एक संख्या नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की कहानी है जिनके लिए खेती अब लाभ का नहीं, बल्कि कर्ज़ का सौदा बन चुकी है।
पंजाब का किसान कर्ज़ के बोझ तले खेती नहीं, अब कर्ज़ उगा रहा है
आंकड़े बताते हैं कि प्रति जोत औसतन करीब 10 लाख रुपये की देनदारी है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह बोझ इतना भारी है कि फसल बेचने के बाद भी कर्ज़ कम होने के बजाय बढ़ता ही चला जाता है। लागत बढ़ती जा रही है—बीज, खाद, कीटनाशक, डीज़ल और बिजली—लेकिन फसलों के दाम उसी रफ्तार से नहीं बढ़ते।
खेती की लागत तेज़ी से बढ़ी
बीज, खाद, कीटनाशक डीज़ल, मशीनें हर चीज़ महंगी हुई।
लेकिन
MSP सीमित फसलों तक
मुनाफ़ा लागत के मुकाबले कम
नतीजा खर्च निकालने के लिए कर्ज।
छोटे किसानों की मजबूरी
पंजाब के किसानों पर इतना कर्ज कैसे चढ़ा? जानिए पूरी वजह
पंजाब के किसानों पर बढ़ता कर्ज किसी एक कारण से नहीं, बल्कि सालों से जमा होती गई गलत नीतियों, बढ़ती लागत और सीमित विकल्पों का नतीजा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश किसान अब निजी बैंकों और साहूकारों से कर्ज़ लेने को मजबूर हैं। सहकारी बैंकों और सरकारी संस्थानों से समय पर और पर्याप्त ऋण न मिलने के कारण किसान ऊँची ब्याज दरों वाले कर्ज़ के जाल में फँस जाते हैं। यह कर्ज़ धीरे-धीरे खेती से निकलकर घर, ज़मीन और भविष्य तक को गिरवी रख देता है।
कर्ज़ का यह दबाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक संकट भी पैदा कर रहा है। कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं, तो कई परिवारों में अगली पीढ़ी खेती से दूरी बना रही है।
पंजाब की खेती को बचाने के लिए कर्ज़ राहत, वैकल्पिक फसल नीति और किसान-हितैषी वित्तीय व्यवस्था अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह संकट और गहराता जाएगा।
पंजाब में बड़ी संख्या में किसान छोटी जोत वाले हैं। कम ज़मीन से • आमदनी सीमि • जोखिम ज्यादा ,एक खराब फसल पूरा साल बिगाड़ देती है।
