न्यूज़ीलैंड में नगर कीर्तन पर विवाद विदेशी लोगों ने रास्ते में रोका जुलूस , New Zealand Nagar Kirtan , News

न्यूज़ीलैंड में चलता नगर कीर्तन और अचानक हुआ विरोध पंजाबियों की आस्था बनाम विदेशी आपत्ति
पंजाबियों के नगर कीर्तन को देखकर क्यों बढ़ गए अंग्रेज लोग
विदेशों में बसे भारतीय, खासकर पंजाबी समुदाय, अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को बड़े गर्व के साथ जीवित रखते हैं। गुरुद्वारों से निकलने वाले नगर कीर्तन सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं होते, बल्कि यह शांति, सेवा और भाईचारे का संदेश भी होते हैं। लेकिन हाल ही में न्यूज़ीलैंड में निकाले गए एक नगर कीर्तन के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरी पंजाबी कम्युनिटी को झकझोर कर रख दिया।
न्यूज़ीलैंड के एक शहर में सैकड़ों की संख्या में पंजाबी श्रद्धालु नगर कीर्तन में शामिल थे। पारंपरिक कीर्तन, शबद गायन और सेवा भाव के साथ यह यात्रा आगे बढ़ रही थी। तभी अचानक वहां मौजूद अंग्रेज़ी मूल के कुछ लोगों की एक टीम ने इस नगर कीर्तन का विरोध करना शुरू कर दिया।

विरोध इतना बढ़ गया कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई और नगर कीर्तन को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।
विरोध का कारण क्या था
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध करने वाले लोगों का कहना था कि
सड़क पर धार्मिक जुलूस निकालने से उन्हें असुविधा हो रही है
ट्रैफिक और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है
हालांकि, पंजाबी समुदाय का कहना था कि
नगर कीर्तन के लिए पहले से अनुमति ली गई थी
पूरी व्यवस्था शांतिपूर्ण थी
कहीं भी हिंसा या जबरदस्ती नहीं हो रही थी
यही बात इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना देती है।
नगर कीर्तन सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सिख इतिहास और बलिदान से जुड़ा हुआ आयोजन है। जब इसे रोका गया, तो वहां मौजूद बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों की भावनाएँ आहत हुईं। कुछ श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू थे, क्योंकि वे हजारों किलोमीटर दूर अपने धर्म और संस्कृति को बचाने की कोशिश कर रहे थे।न्यूज़ीलैंड में रोका गया यह नगर कीर्तन सिर्फ एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह सवाल था आस्था, पहचान और अधिकारों का। पंजाबी समुदाय ने हमेशा शांति और सेवा का रास्ता चुना है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाएगा और हर समुदाय को अपने धर्म और संस्कृति को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलेगा।
न्यूज़ीलैंड को दुनिया के उन देशों में गिना जाता है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता और मल्टी-कल्चर को बढ़ावा दिया जाता है। ऐसे में इस तरह का विरोध कई सवाल खड़े करता है
इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पंजाबी समुदाय में गुस्सा और दुख दोनों देखने को मिले। कई लोगों ने इसे शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन के खिलाफ भेदभाव बताया। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और स्पष्ट नियमों की मांग की।
