किसान-मजदूर मोर्चा पंजाब का बड़ा ऐलान , CM मान समेत मंत्रियों और विधायकों के घरों के घेराव की चेतावनी
पंजाब में एक बार फिर किसान और मजदूर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। किसान-मजदूर मोर्चा पंजाब ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़े संघर्ष का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। मोर्चा ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही 5 फरवरी को एक दिवसीय धरना लगाने का भी ऐलान किया गया है।
यह आंदोलन किसानों और मजदूरों से जुड़े कई लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर शुरू किया जा रहा है, जिन्हें लेकर सरकार पर अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं।
किन मुद्दों को लेकर ऐलान हुआ संघर्ष?
किसान-मजदूर मोर्चा का कहना है कि पंजाब में खेती और मजदूरी से जुड़े वर्ग लगातार आर्थिक दबाव में हैं। कर्ज, महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी वादों के अधूरे रहने से हालात और बिगड़ गए हैं। मोर्चा के अनुसार, सरकार ने चुनावों के दौरान और बाद में कई घोषणाएं की थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया।
मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:
• किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ किया जाए
• भूमिहीन मजदूरों को पक्के प्लॉट और रोजगार की गारंटी
• फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी
• बिजली, डीज़ल और खाद की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण
• सरकारी नौकरियों में पंजाब के युवाओं को प्राथमिकता
मोर्चा का आरोप है कि इन मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
5 फरवरी को एक दिवसीय धरना
किसान-मजदूर मोर्चा ने साफ किया है कि यह संघर्ष चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसके पहले चरण में 5 फरवरी को पूरे पंजाब में एक दिन का धरना लगाया जाएगा। इस धरने के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी जाएगी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरनों में किसान, खेत मजदूर, दिहाड़ी मजदूर और विभिन्न मजदूर संगठनों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। मोर्चा के नेताओं का कहना है कि यह केवल शुरुआत है।
मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव
मोर्चा ने यह भी ऐलान किया है कि अगर धरनों के बाद भी सरकार ने बातचीत की पहल नहीं की, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान, मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव किया जाएगा। यह कदम सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया जाएगा ताकि किसानों और मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज न किया जा सके।
हालांकि, मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार की नीतियों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई जाएगी।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
किसान-मजदूर संगठनों का कहना है कि पंजाब सरकार खुद को किसान-हितैषी बताती है, लेकिन हकीकत में हालात बदलते नजर नहीं आ रहे। कर्ज के बोझ तले दबे किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हैं, जबकि मजदूर वर्ग महंगाई से जूझ रहा है।
मोर्चा के नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब सरकार बड़े-बड़े विकास के दावे कर रही है, तो किसानों और मजदूरों की बुनियादी समस्याएं क्यों जस की तस बनी हुई हैं?
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
इस ऐलान के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि किसानों और मजदूरों का गुस्सा सरकार की नाकामी का परिणाम है। वहीं, सत्ताधारी दल की ओर से अभी तक इस संघर्ष पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो यह आंदोलन पंजाब में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
किसान-मजदूर मोर्चा पंजाब का यह संघर्ष न सिर्फ सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, बल्कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और सामाजिक माहौल पर भी गहरा असर डाल सकता है। 5 फरवरी का एक दिवसीय धरना इस आंदोलन की दिशा तय करेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार किसानों और मजदूरों की मांगों को लेकर क्या रुख अपनाती है—संवाद का या टकराव का।
