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कनाडा छोड़ पंजाब लौटे वीरिंदर सिंह परिहार, गरीबों के लिए बन चुके हैं दानी देवता – Home For Home Les

पंजाब के दानी देवता

आज के समय में जब इंसान अपनी जरूरतों तक सीमित होता जा रहा है, वहीं पंजाब के होशियारपुर शहर से एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जो इंसानियत की मिसाल बन चुका है। वीरिंदर सिंह परिहार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सैकड़ों बेघर परिवारों के लिए उम्मीद की किरण हैं। लोग उन्हें प्यार से दानी देवता कहते हैं, और यह नाम उन्होंने अपने कर्मों से कमाया है।

वीरिंदर सिंह परिहार पिछले कई वर्षों से गरीब और बेसहारा लोगों को पक्का घर बनाकर दान कर रहे हैं। अब तक वह ढाई सौ (250+) से अधिक घर जरूरतमंद परिवारों को सौंप चुके हैं। ये घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और नए जीवन की शुरुआत हैं।

वीरिंदर सिंह परिहार, जो गरीबों को दे रहे हैं अपना आशियाना

गांवों और झुग्गियों में रहने वाले लोग, जिनके पास सिर छुपाने तक की जगह नहीं थी, आज अपने खुद के घर में चैन की नींद सोते हैं। दो कमरे वाला सादा लेकिन मजबूत घर, जिसमें छत, दीवारें और एक सुरक्षित भविष्य होता है – यही वीरिंदर सिंह परिहार का सपना है।

उनका मानना है कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। बिना किसी प्रचार, राजनीति या दिखावे के वह लगातार समाज सेवा में लगे हुए हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि वह कई बार खुद निर्माण स्थल पर जाकर काम की निगरानी करते हैं, ताकि घर सही और मजबूत बने।

वरेंदर सिंह जी परिहार पहले पंजाब से कनाडा गए थे और कुछ समय तक वहीं रहकर जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन गरीबों की पीड़ा और अपने समाज के प्रति जिम्मेदारी ने उन्हें वापस पंजाब आने के लिए मजबूर कर दिया। आज वे खुद पंजाब में रहकर जरूरतमंद लोगों के लिए घर बनवाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि उनकी पूरी फैमिली अब भी कनाडा में ही रहती है। परिवार से दूर रहकर भी उन्होंने मानव सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। यह त्याग और समर्पण ही उन्हें सच्चे मायनों में दानी देवता बनाता है।

आज जब समाज को ऐसे लोगों की सबसे ज्यादा जरूरत है, वीरिंदर सिंह परिहार जैसे लोग यह साबित करते हैं कि एक इंसान भी चाहे तो सैकड़ों जिंदगियाँ बदल सकता है। सच में, पंजाब की धरती ने एक सच्चा दानी देवता जन्म दिया है।

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