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स्कूली बच्चियों को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश, अब हर स्कूल में मिलेंगे फ्री सैनिटरी पैड

स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

देश की लाखों स्कूली छात्राओं के स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और सराहनीय आदेश दिया है। इस फैसले के तहत अब देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाली बच्चियों को फ्री सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

कोर्ट ने साफ कहा है कि मासिक धर्म के कारण किसी भी बच्ची की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। कई बार सुविधाओं की कमी के कारण छात्राएं स्कूल आना छोड़ देती हैं, जिससे उनकी शिक्षा पर नकारात्मक असर पड़ता है। इस आदेश से लड़कियों की स्कूल ड्रॉपआउट दर कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

सिर्फ सैनिटरी पैड ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग और स्वच्छ वॉशरूम बनाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही, दिव्यांग बच्चियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाजनक वॉशरूम निर्माण पर भी जोर दिया गया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का पालन नहीं करता है और छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराता, तो उस स्कूल की मान्यता (Recognition) रद्द की जा सकती है। यह नियम बिना किसी भेदभाव के सभी स्कूलों पर लागू होगा।

यह फैसला न केवल बच्चियों के स्वास्थ्य अधिकार को मजबूत करता है, बल्कि लैंगिक समानता और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

यह आदेश आने वाले समय में भारत की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

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