सरपंच-पंच की विदेश यात्रा पर सख्ती – क्या बदलने जा रहा है सिस्टम – Panch Sarpanch New Rules

पंजाब सरकार ने हाल ही में एक ऐसा नियम लागू किया है जिसने पूरे पंचायत तंत्र में हलचल मचा दी है। नए नियम के अनुसार अब कोई भी सरपंच, पंच या पंचायत समिति/ज़िला परिषद का चुना हुआ प्रतिनिधि अगर विदेश जाना चाहता है, तो पहले सरकार से “अनुमति पत्र” लेना अनिवार्य होगा। बिना परमिशन बाहर देश जाने पर उन पर कार्रवाई भी हो सकती है।
गवर्नमेंट ने यह नियम लागू क्यों किया
कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है। गांव के पंचायत सरपंच किसी भी ग्रंथ में घपला करके पैसा खा जाते हैं। फिर विदेश भाग जाते हैं। इसलिए यह कदम उठाया गया है कि कोई भी आदमी गफला ना कर सके।
पंचायत प्रतिनिधि विदेश यात्रा पर जाने से पहले लिखित अनुमति लेंगे।
सरपंच/पंच को अपनी यात्रा का कारण बताकर आवेदन देना होगा।
जांच के बाद अनुमति पत्र” जारी किया जाएगा।
अनुमति लिए बिना विदेश चले जाने पर यह कर्तव्य में लापरवाही मानी जाएगी इसके बाद प्रतिनिधि पर जुर्माना, कार्रवाई या पद से हटाने तक की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।परमिशन का रिकॉर्ड जिला प्रशासन और पंचायत विभाग दोनों के पास रखा जाएगा। कई मामलों में देखा गया है कि कुछ सरपंच और पंच लंबे समय तक विदेश चले जाते थे और गाँव की विकास योजनाएँ रुक जाती थीं। सड़क, नाली, पानी जैसी योजनाएँ अटक जाती थीं और जनता को परेशानी होती थी।
यह नियम क्यों लागू किया गया है
सरपंच-पंच के माध्यम से सरकार करोड़ों रुपये गाँवों के विकास पर खर्च करती है। अगर वही जिम्मेदार अधिकारी लंबे समय तक गायब रहें, तो फंड के उपयोग में गड़बड़ी के आसार बढ़ जाते हैं। कुछ प्रतिनिधि विदेश जाकर महीनों तक लौटते नहीं थे, पर वेतन, भत्ता और अधिकारों का उपयोग जारी रहता था।
सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए नियम सख्त कर दिया है।
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