सरकार का बड़ा आदेश: मौत के बाद अस्पताल बिल वसूली पूरी तरह बंद , परिवार पर नहीं पड़ेगा बोझ सभी हॉस्पिटलों को दिए गवर्नमेंट ने सख्त आदेश।

प्राइवेट अस्पतालों को मानने होंगे सरकारी आदेश
देश में स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित और मानवीय बनाने के लिए सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए कई सख्त लेकिन ज़रूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अक्सर देखा गया है कि कुछ अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद परिजनों को बिल चुकाने तक मृत शरीर देने से मना कर दिया जाता है। यह न केवल अमानवीय है बल्कि कानून के विरुद्ध भी है। अब सरकार ने स्पष्ट शब्दों में आदेश जारी कर दिया है कि . किसी भी अस्पताल में मरीज की मृत्यु के बाद शव को परिजनों को रोककर नहीं रखा जा सकता, चाहे बिल चुकाया गया हो या नहीं।
चलिए, जानते हैं इस पूरे आदेश की मुख्य बातें। सभी प्राइवेट अस्पतालों में शवघर (Mortuary) अनिवार्य
सरकार का पहला अहम निर्देश है कि अब हर प्राइवेट अस्पताल में
आधुनिक सुविधाओं वाला शवघर होना चाहिए
कम से कम 24 घंटे शव सुरक्षित रखने की सुविधा अनिवार्य है
बड़े अस्पतालों में मल्टी-चैंबर मॉर्चरी भी अनिवार्य होगी . यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि . शवों को गलियारे में रखने की शर्मनाक स्थिति न बने . परिजनों को शव सुरक्षित मिल सके लापरवाही के मामले कम हों .
बिल न देने पर भी शव परिजनों को तुरंत सौंपना अनिवार्य
सरकार ने कहा कि अस्पताल किसी भी हालत में मृत शरीर को बिल क्लियर नहीं हुआ कहकर रोक नहीं सकते। पहले शव दिया जाएगा, उसके बाद बिल का समाधान कानूनी तरीके से किया जा सकता है। यह निर्देश इसलिए ज़रूरी है क्योंकि कई बार गरीब परिवार बिल चुकाने में असमर्थ होते हैं अस्पताल शव रोककर मानसिक दबाव बनाते हैं , परिजन अपमान, डर और दर्द में फंस जाते हैं अब ऐसा करने पर अस्पतालों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस कार्रवाई हो सकती है। अस्पतालों में सरकारी आदेश के बोर्ड लगाना अनिवार्य . बिल न भरने पर भी शव परिजनों को तुरंत सौंपा जाएगा . अस्पताल में शवघर अनिवार्य है।
अगर किसी मरीज की पहचान नहीं हो पाती या परिवार नहीं पहुंचता, तो अस्पताल को तुरंत प्रशासन को सूचना देनी होगी . 72 घंटे तक शव को मॉर्चरी में सुरक्षित रखा जाएगा . उसके बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और नगर निगम द्वारा सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाएगा . सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी शव बिना सम्मान और पहचान के न छोड़ा जाए।आदेश न मानने पर बड़े जुर्माने और कार्रवाई .
लाइसेंस निलंबन / जिम्मेदार अधिकारियों पर केस/ जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अस्पताल लाखों रुपये का बिल बनाकर शव रोक देते थे . इन समस्याओं को खत्म करने के लिए ये नए नियम बनाए गए हैं।
