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पालंपुर की शान देवधार अब विकास की बलि चढ़ रही है – जहां देवता बसते थे, वहां अब कुल्हाड़ियां गूंजती हैं

देवधार की चीख: हिमाचल के पालंपुर में प्रकृति की शान पर चल रही कुल्हाड़ी | पालमपुर देवभूमि का बन रहा है। मजाक हो रहा है बहुत ज्यादा सरासर नाइंसाफी।

हिमाचल प्रदेश का पालंपुर जिला जिसे कभी “देवभूमि की हरियाली की सांस” कहा जाता था, आज दर्द में कराह रहा है। यहाँ के देवधार के पेड़ जो न केवल प्रकृति की शान बल्कि हिमाचल की आत्मा का प्रतीक थे अब बेदर्दी से काटे जा रहे हैं।कानून भी इस पर रोक नहीं लगा।

देवधार Deodar का अर्थ ही है “देवताओं का वृक्ष”। ये वही वृक्ष हैं जिनकी छांव में सदियों से साधु-संत ध्यान लगाते रहे, जिनकी खुशबू से पहाड़ों की हवा तक पवित्र लगती थी। लेकिन आज वही पेड़ जो पर्यावरण संतुलन और हिमालय की सुंदरता के प्रहरी थे, अब विकास के नाम पर बलि चढ़ रहे हैं।अब ऐसा लगता है कि कलयुग आ गया है और हिमाचल प्रदेश पर संकट मंडराने लगा है।पेड़ों की कटाई न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि वहाँ के जल स्रोतों और मौसम पर भी गहरा असर डाल रही है। झरने सूख रहे हैं मिट्टी बह रही है और तापमान में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

प्रकृति बदले में बहुत कुछ देती है, लेकिन जब हम उससे उसकी साँसें छीन लेते हैं, तो वह चुप नहीं रहती। हिमाचल के पालंपुर में देवधार की पुकार सिर्फ एक जंगल की नहीं बल्कि हमारी चेतना की है जिसे अभी भी बचाया जा सकता है अगर हम चाहें तो बाकी हम अपने हिमाचल की पब्लिक पर छोड़ते हैं कि देवदार के पेड़ काटने चाहिए या नहीं

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