पंजाब में बन गया गरीबों के लिए रोजगार 341 नई फैक्ट्री शुरुआत। वही हरियाणा में 1400 फैक्ट्रियां बंद।

देश में औद्योगिक विकास किसी भी राज्य की आर्थिक रीढ़ होता है। लेकिन जब सरकार की नीतियाँ उद्योगों के अनुकूल न हों, तो उसका सीधा असर फैक्ट्रियों, रोजगार और निवेश पर पड़ता है। हरियाणा में बीते कुछ वर्षों में यही देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में बीजेपी सरकार की निवेश विरोधी नीतियों के कारण 1446 फैक्ट्रियाँ बंद हो चुकी हैं। इससे न केवल उद्योगपति हतोत्साहित हुए हैं, बल्कि लाखों मजदूरों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हुआ है।
उच्च बिजली दरें, जटिल नियम, प्रशासनिक बाधाएं और निवेशकों को पर्याप्त सुविधाओं का अभाव—ये सभी कारण हरियाणा से उद्योगों के पलायन की बड़ी वजह बने हैं। कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या फिर दूसरे राज्यों की ओर रुख करने को मजबूर हुए।
इसके विपरीत, पंजाब में मान सरकार की उद्योग-पक्षीय और निवेश समर्थक नीतियों ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। पंजाब में अब तक 341 नई फैक्ट्रियाँ शुरू हो चुकी हैं, जो राज्य के बढ़ते औद्योगिक भरोसे को दर्शाता है। सस्ती बिजली, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, पारदर्शी प्रशासन और निवेशकों को सुरक्षा—इन फैसलों ने पंजाब को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाया है।
मान सरकार का स्पष्ट फोकस रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा और युवाओं के लिए अवसर पैदा करने पर है। यही कारण है कि पंजाब आज निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
कुल मिलाकर, हरियाणा और पंजाब की स्थिति यह साबित करती है कि सरकार की नीतियाँ ही तय करती हैं कि उद्योग फलेंगे या बंद होंगे। सही फैसले विकास की राह खोलते हैं, जबकि गलत नीतियाँ आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं।
