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पंजाब की महिलाओं द्वारा लिया गया 52,259 करोड़ का कर्ज , PM Mudra Yojana ,

पंजाब की महिलाएँ—कर्ज लेने में हरियाणा से भी आगे . मुद्रा योजना की असली चैंपियन बनीं पंजाब की महिलाएँ

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत पिछले 5 वर्षों में पंजाब की महिलाओं ने 52,259 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह आँकड़ा सिर्फ पैसा नहीं दिखाता, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा सबूत है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में पंजाब ने हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, जम्मू और चंडीगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों की महिलाओं को भी पीछे छोड़ दिया है।पंजाब की महिलाएँ आखिर आगे कैसे निकलीं – इस बदलाव की वजह क्या है – आइए इसे एक आसान और गहराई वाली रिपोर्ट के रूप में समझते हैं।

पिछले कुछ सालों में पंजाब के गांवों में छोटे-छोटे बिज़नेस शुरू करने की सोच तेज़ी से बढ़ी है। महिलाओं ने खासतौर पर इन क्षेत्रों में कर्ज लेकर काम शुरू किए . सिलाई–कढ़ाई और बुटीक / घरेलू उत्पाद (अचार, पापड़, मसाले) डेयरी यूनिट / ब्यूटी पार्लर और मेहंदी आर्ट / फूड डिलीवरी और टिफ़िन सर्विस . हैंडीक्राफ्ट और चूड़ी कारोबार – मुद्रा योजना ने इन्हें आसान और बिना गारंटी वाला कर्ज दिया, जिससे महिलाओं का भरोसा बढ़ा।अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में महिलाओं की बैंकिंग पहुंच बेहतर है

यही कारण है कि यहाँ कर्ज लेना और उसे सही दिशा में उपयोग करना आसान बन गया। हरियाणा में महिला उद्यमिता का दायरा बढ़ तो रहा है, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक बाधाएँ आज भी कई जगह मौजूद हैं। इसके मुकाबले पंजाब में . इसी वजह से पंजाब की महिलाएँ कर्ज लेने और बिज़नेस शुरू करने में आगे निकल गईं।

₹52,259 करोड़ का कर्ज दर्शाता है कि पंजाब की महिलाओं ने केवल पैसा ही नहीं लिया, बल्कि भविष्य को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। यह संख्या बताती है / महिलाएँ जोखिम लेने लगी हैं
रोजगार पैदा कर रही हैं
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है – पंजाब ने जिन राज्यों को पीछे छोड़ा है, वहाँ कर्ज का स्तर कम रहने के कई कारण हैं / दिल्ली: छोटे परिवार और सीमित स्थानीय उद्योग
हिमाचल: भौगोलिक सीमाएँ और कम व्यापारिक अवसर
जम्मू: अस्थिर माहौल और कम औद्योगिक गतिविधियाँ
चंडीगढ़: आर्थिक आकार छोटा, आबादी कम

इन सभी के मुकाबले पंजाब की महिलाएँ अधिक सक्रिय और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में आगे बढ़ रही हैं। यह रिपोर्ट साफ दिखाती है कि पंजाब में महिलाएँ अब केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि कारोबार, स्टार्ट-अप और स्व-रोज़गार की असली धुरी बन चुकी हैं।. पंजाब में ज्यादा डेवलपमेंट की वजह से बच्चों की पढ़ाई स्कूल कॉलेज और ज्यादा हाई फैसिलिटी के कारण पंजाब की महिलाओं ने ज्यादा लोन लेकर अपना सुधार में आवृत्ति खिलाने की कोशिश की है।

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